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अध्यक्ष महोदय, मैं आपको एक और बात बतलाना चाहती हूँ और वह यह है कि कृषि विभाग को योजना आयोग ने बहुत गलत रास्ते में बिठा दिया है। उन लोगों के पास लड़ने के लिए दम नहीं है और देश में खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ाने के लिए जो योजनाएँ चाहिए और उनके लिए जो धनराशि चाहिए वे उनकी पूरी तरह संस्वीकृत नहीं करा पाते हैं। कृषि विभाग तो जमीन की तरह आधार होता है और उसी पर देश के लिए पर्याप्त अन्न पैदा करने का महान भार है। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि अधिक अन्न उपजाने के मार्ग में जो भी आवश्यक कदम यह विभाग उठाना चाहे उसमें किसी तरह की रुकावट न हो। बहुत-सी हड़तालें हो सकती हैं। मजदूर काम से बरी हो सकते हैं लेकिन किसी भी हालत में वे खाने से बरी नहीं हो सकते। अब हम देखते हैं कि मिलों और कारखानों में हड़तालें हो जाती हैं। छुट्टी हो जाती है तो आप काम के दिनों की अपेक्षा लोग उन दिनों में ज्यादा खाना खाते हैं ज्यादा दावतें करते हैं। आज यह हमारे लिए यह सर्वाधिक महत्व का विषय है कि हमारा अन्न का उत्पादन उस गति से बढ़े ताकि हम अपनी खपत से अधिक उत्पादन कर उसका निर्यात कर सकें।सरकार तथा इस मंत्रालय के लिए यह समस्या एक बड़ा सिरदर्द पैदा कर रही है। हर एक विभाग में बड़े-बड़े अधिकारी बैठे हैं और हजारों रुपए के बड़े-बड़े वेतन ले रहे हैं। लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि उनका दिमाग कार्यालय की मिसिलों और कागजों में लगा रहता है। इस विभाग का काम बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक कोप के कारण जो समय-समय पर हमारी फसलों को नुकसान होता है इससे भी अपनी फसलों की रक्षा करने के लिए आवश्यक कदम उठाना इसके जिम्मे है। आज मेरे पास लखनऊ से कुछ लोग आए थे और वे लोग बोल रहे थे कि यहाँ दिल्ली में इस अवसर पर ठंडी हवा चल रही है और आप यहाँ दरवाजे बंद करके बैठे हैं या आराम से लेटे हैं लेकिन हमारी तो जान खतरे में है। वहाँ ओले गिर रहे हैं और हमारी गेहूँ की फसल खतरे में है। अब यह इस विभाग का काम है कि चूँकि हवा में पानी ज्यादा होता है इसलिए फसल के बचाव के लिए उस पर नियंत्रण किया जाए जिससे फसल की हानि न हो। अध्यक्ष महोदय, मैं आपको एक और बात बतलाना चाहती हूँ और वह यह है कि कृषि विभाग को योजना आयोग ने बहुत गलत रास्ते में बिठा दिया है। उन लोगों के पास लड़ने के लिए दम नहीं है और देश में खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ाने के लिए जो योजनाएँ चाहिए और उनके लिए जो धनराशि चाहिए वे उनकी पूरी तरह संस्वीकृत नहीं करा पाते हैं। कृषि विभाग तो जमीन की तरह आधार होता है और उसी पर देश के लिए पर्याप्त अन्न पैदा करने का महान भार है। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि अधिक अन्न उपजाने के मार्ग में जो भी आवश्यक कदम यह विभाग उठाना चाहे उसमें किसी तरह की रुकावट न हो। बहुत-सी हड़तालें हो सकती हैं। मजदूर काम से बरी हो सकते हैं लेकिन किसी भी हालत में वे खाने से बरी नहीं हो सकते। अब हम देखते हैं कि मिलों और कारखानों में हड़तालें हो जाती हैं। छुट्टी हो जाती है तो आप काम के दिनों की अपेक्षा लोग उन दिनों में ज्यादा खाना खाते हैं ज्यादा दावतें करते हैं। आज यह हमारे लिए यह सर्वाधिक महत्व का विषय है कि हमारा अन्न का उत्पादन उस गति से बढ़े ताकि हम अपनी खपत से अधिक उत्पादन कर उसका निर्यात कर सकें।सरकार तथा इस मंत्रालय के लिए यह समस्या एक बड़ा सिरदर्द पैदा कर रही है। हर एक विभाग में बड़े-बड़े अधिकारी बैठे हैं और हजारों रुपए के बड़े-बड़े वेतन ले रहे हैं। लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि उनका दिमाग कार्यालय की मिसिलों और कागजों में लगा रहता है। इस विभाग का काम बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक कोप के कारण जो समय-समय पर हमारी फसलों को नुकसान होता है इससे भी अपनी फसलों की रक्षा करने के लिए आवश्यक कदम उठाना इसके जिम्मे है। आज मेरे पास लखनऊ से कुछ लोग आए थे और वे लोग बोल रहे थे कि यहाँ दिल्ली में इस अवसर पर ठंडी हवा चल रही है और आप यहाँ दरवाजे बंद करके बैठे हैं या आराम से लेटे हैं लेकिन हमारी तो जान खतरे में है। वहाँ ओले गिर रहे हैं और हमारी गेहूँ की फसल खतरे में है। अब यह इस विभाग का काम है कि चूँकि हवा में पानी ज्यादा होता है इसलिए फसल के बचाव के लिए उस पर नियंत्रण किया जाए जिससे फसल की हानि न हो।
अध्यक्ष महोदय, मैं आपको एक और बात बतलाना चाहती हूँ और वह यह है कि कृषि विभाग को योजना आयोग ने बहुत गलत रास्ते में बिठा दिया है। उन लोगों के पास लड़ने के लिए दम नहीं है और देश में खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ाने के लिए जो योजनाएँ चाहिए और उनके लिए जो धनराशि चाहिए वे उनकी पूरी तरह संस्वीकृत नहीं करा पाते हैं। कृषि विभाग तो जमीन की तरह आधार होता है और उसी पर देश के लिए पर्याप्त अन्न पैदा करने का महान भार है। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि अधिक अन्न उपजाने के मार्ग में जो भी आवश्यक कदम यह विभाग उठाना चाहे उसमें किसी तरह की रुकावट न हो। बहुत-सी हड़तालें हो सकती हैं। मजदूर काम से बरी हो सकते हैं लेकिन किसी भी हालत में वे खाने से बरी नहीं हो सकते। अब हम देखते हैं कि मिलों और कारखानों में हड़तालें हो जाती हैं। छुट्टी हो जाती है तो आप काम के दिनों की अपेक्षा लोग उन दिनों में ज्यादा खाना खाते हैं ज्यादा दावतें करते हैं। आज यह हमारे लिए यह सर्वाधिक महत्व का विषय है कि हमारा अन्न का उत्पादन उस गति से बढ़े ताकि हम अपनी खपत से अधिक उत्पादन कर उसका निर्यात कर सकें।सरकार तथा इस मंत्रालय के लिए यह समस्या एक बड़ा सिरदर्द पैदा कर रही है। हर एक विभाग में बड़े-बड़े अधिकारी बैठे हैं और हजारों रुपए के बड़े-बड़े वेतन ले रहे हैं। लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि उनका दिमाग कार्यालय की मिसिलों और कागजों में लगा रहता है। इस विभाग का काम बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक कोप के कारण जो समय-समय पर हमारी फसलों को नुकसान होता है इससे भी अपनी फसलों की रक्षा करने के लिए आवश्यक कदम उठाना इसके जिम्मे है। आज मेरे पास लखनऊ से कुछ लोग आए थे और वे लोग बोल रहे थे कि यहाँ दिल्ली में इस अवसर पर ठंडी हवा चल रही है और आप यहाँ दरवाजे बंद करके बैठे हैं या आराम से लेटे हैं लेकिन हमारी तो जान खतरे में है। वहाँ ओले गिर रहे हैं और हमारी गेहूँ की फसल खतरे में है। अब यह इस विभाग का काम है कि चूँकि हवा में पानी ज्यादा होता है इसलिए फसल के बचाव के लिए उस पर नियंत्रण किया जाए जिससे फसल की हानि न हो। अध्यक्ष महोदय, मैं आपको एक और बात बतलाना चाहती हूँ और वह यह है कि कृषि विभाग को योजना आयोग ने बहुत गलत रास्ते में बिठा दिया है। उन लोगों के पास लड़ने के लिए दम नहीं है और देश में खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ाने के लिए जो योजनाएँ चाहिए और उनके लिए जो धनराशि चाहिए वे उनकी पूरी तरह संस्वीकृत नहीं करा पाते हैं। कृषि विभाग तो जमीन की तरह आधार होता है और उसी पर देश के लिए पर्याप्त अन्न पैदा करने का महान भार है। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि अधिक अन्न उपजाने के मार्ग में जो भी आवश्यक कदम यह विभाग उठाना चाहे उसमें किसी तरह की रुकावट न हो। बहुत-सी हड़तालें हो सकती हैं। मजदूर काम से बरी हो सकते हैं लेकिन किसी भी हालत में वे खाने से बरी नहीं हो सकते। अब हम देखते हैं कि मिलों और कारखानों में हड़तालें हो जाती हैं। छुट्टी हो जाती है तो आप काम के दिनों की अपेक्षा लोग उन दिनों में ज्यादा खाना खाते हैं ज्यादा दावतें करते हैं। आज यह हमारे लिए यह सर्वाधिक महत्व का विषय है कि हमारा अन्न का उत्पादन उस गति से बढ़े ताकि हम अपनी खपत से अधिक उत्पादन कर उसका निर्यात कर सकें।सरकार तथा इस मंत्रालय के लिए यह समस्या एक बड़ा सिरदर्द पैदा कर रही है। हर एक विभाग में बड़े-बड़े अधिकारी बैठे हैं और हजारों रुपए के बड़े-बड़े वेतन ले रहे हैं। लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि उनका दिमाग कार्यालय की मिसिलों और कागजों में लगा रहता है। इस विभाग का काम बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक कोप के कारण जो समय-समय पर हमारी फसलों को नुकसान होता है इससे भी अपनी फसलों की रक्षा करने के लिए आवश्यक कदम उठाना इसके जिम्मे है। आज मेरे पास लखनऊ से कुछ लोग आए थे और वे लोग बोल रहे थे कि यहाँ दिल्ली में इस अवसर पर ठंडी हवा चल रही है और आप यहाँ दरवाजे बंद करके बैठे हैं या आराम से लेटे हैं लेकिन हमारी तो जान खतरे में है। वहाँ ओले गिर रहे हैं और हमारी गेहूँ की फसल खतरे में है। अब यह इस विभाग का काम है कि चूँकि हवा में पानी ज्यादा होता है इसलिए फसल के बचाव के लिए उस पर नियंत्रण किया जाए जिससे फसल की हानि न हो।
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